Header Ads

AAP TAK NEWS : कोरोना की दवा भारत ने खोजी , इलाज में कितनी होगी कारगर?

                                                         

                                         

                                                      पिछले दो दिन से सोशल मीडिया पर खबरें चल रही हैं कि भारत में कोरोना की दवा बन गई है। लोग इस दवा का नाम भी खूब शेयर कर रहे हैं। फैबिफ्लू नाम  की इस दवा को कोरोना के तोड़ के तौर पर पेश किया जा रहा है। भारत में ये दवा ग्लेनमार्क फार्मा कंपनी बनाती है। 
                          फैबिफ्लू एक रीपर्पस्ड दवा है। इसका मतलब ये है कि इस दवा का इस्तेमाल पहले से फ्लू की बीमारी के इलाज में किया जाता रहा है। रेमडेसिवियर की ही तरह ये भी एक एंटीवायरल दवा
                            इस दवा को बनाने वाली फार्मास्युटिकल कंपनी ग्लेनमार्क का दावा है कि कोविड-19 के माइल्ड और मॉडरेट मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और परिणाम सकारात्मक आए हैं। ग्लेनमार्क कंपनी का दावा है कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने इस दवा के ट्रायल के लिए सशर्त मंजूरी दी है।
                                         

                               
                                
                                                    ये शर्त है- इस दवा का केवल इमरजेंसी में और रेस्ट्रिक्टेड इस्तेमाल करने के लिए। इमरजेंसी इस्तेमाल का मतलब ये है कि कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत है।

रेस्ट्रिक्टेड इस्तेमाल का मतलब है कि जिस किसी कोविड-19 के मरीज को इलाज के दौरान ये दवा दी जाएगी, उसके लिए पहले मरीज की सहमति अनिवार्य होगी। हालांकि बीबीसी ने इस बारे में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से संपर्क किया है। अभी तक उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है।
                                  बीबीसी ने भारत सरकार के दूसरे विभाग वैज्ञानिक और ओद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के डीजी डॉक्टर शेखर मांडे से बात की। उन्होंने माना कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से इस दवा के लिए इमरजेंसी और रेस्ट्रिक्टेड ट्रायल की इजाजत मिल गई है। 

                                                  डॉक्टर शेखर मांडे के मुताबिक जापान और रूस में इसका इस्तेमाल पहले से किया जाता रहा है। इस लिहाज से ये खबर भारत के लिए 'गुड न्यूज' जरूर है।

डॉक्टर शेखर ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के सामने पेश किए गए डेटा और ट्रायल रिपोर्ट के आधार पर ही दवाओं के इस्तेमाल के लिए इजाजत मिलती है। इसका मतलब ये है कि ग्लेनमार्क ने जो डेटा पेश किए हैं, उससे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया संतुष्ट हैं और तभी उसके इस्तेमाल के लिए आगे की राह आसान हुई है।
                                                                    
                               
                               
                 
                                               कोविड-19 के इलाज में इस दवा के आने से उम्मीद की एक नई किरण जरूर नजर आई है। डॉक्टर शेखर का माना है कि अब सीधे डॉक्टर इस दवा के इस्तेमाल करने की सलाह मरीजों को दे सकते हैं।
                             वैसे तो इस दवा का दुनिया के कई देशों में कोविड-19 के इलाज के लिए ट्रायल चल रहा है। इसमें जापान, रूस, चीन जैसे बड़े देश शामिल हैं।

भारत में इस दवा का ट्रायल देश के 11 शहरों के 150 कोविड-19 मरीजों पर किया गया। इसमें से 90 मरीज ऐसे थे, जिन्हें हल्का संक्रमण था। जबकि 60 मॉडरेट संक्रमण वाले मरीज थे। सपोर्टिव केयर के साथ इन मरीजों को 14 दिन तक ये दवा देने के बाद सकारात्मक असर देखने को मिला है। 

                   रूस में इस दवा की स्टडी 390 मरीजों पर की गई थी। इस दौरान फैबिफ्लू के इस्तेमाल के चौथे दिन से ही मरीजों में 65 फीसदी सुधार देखने को मिला। रूस में इस दवा को कोविड-19 के इलाज में 80 फीसदी सफल माना जा रहा है।



                                                                    
                                                                www.aaptak.net

No comments