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BIHAR-कोरोना बना काल-कलेक्ट्रेट में छाया अंधेरा, नहीं रहे प्रकाश, डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना नहीं पूरा कर पाएकोरोना ने तेजतर्रार लिपिक प्रकाश को निगला, प्रकाश की मौत से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप

                                    
## दो दिन पहले ही अधिकारियों के साथ मिलकर आपदा से संबंधित रिपोर्ट किया था तैयार
-संजय भारद्वाज-।छपरा
प्रकाश तुम्हारी मेमोरी पावर और कार्य करने की बेहतर क्षमता देख तुम्हें डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए सरकार से अनुशंसा करूंगा, ये वाक्य सारण के ही निवर्तमान डीएम कुंदन कुमार ने अपने आपदा शाखा के तेजतर्रार लिपिक प्रकाश पांडेय के लिए उपयोग किया था, पर प्रकाश को क्या पता था कि जिसके लिए इतनी बात सोची जा रही है वह कुछ साल का ही मेहमान है। सोमवार को पूरे कलेक्ट्रेट में अंधेरा छा गया और प्रकाश हमेशा-हमेशा के लिए अपने परिवार, अपने सहकर्मियों व और अपने प्रिय साथियों को छोर ईश्वर का चहेता बन गया। जैसे ही सोमवार को सारण में कलेक्ट्रेट के चर्चित व तेजतर्रार कर्मी के करोना से मौत की सूचना फैली पूरा प्रशासनिक महकमा सन्न रह गया। किसी को भरोसा ही नहीं हो रहा था। सभी ने कहा कि अभी तो दो दिन पहले ही उसने अधिकारियों व कर्मियों के साथ मिलकर आपदा संबंधित रिपोर्ट तैयार किया है, फिर अचानक ये सब कैसे हो गया? लोगों व सहकर्मियों का प्रकाश के प्रति स्नेह व प्यार इसी से झलक रहा था कि वे बोल रहे थे कि भगवान करे कि मौत की सूचना गलत हो। पर सच्चाई को कैसे टाला जा सकता है। प्रकाश की मौत से हर तबका मायूस है क्योंकि वह लगातार कई सालों तक आपदा से संबंधित कार्यो को निपटाया था। इसमें बाढ, सुखाड़, कोरोना, अगलगी, भूकंप समेत अन्य आपदाएं शामिल हैं, प्रकाश से लोगों का सीधे तौर पर जुड़ाव हो गया था। शायद ही कोई अधिकारी हो जो उनके कार्य से खुश नहीं रहता हो। हमेशा मुस्कुरा कर और हर टेंसन को मजाक बनाकर अपने कार्य को निपटाते रहते थे। 
-थोड़ी लापरवाही नहीं हुई होती तो आज प्रकाश हमारे बीच होते
कोविड-19 में प्रकाश लगातार कार्य कर रहे थे और जिले की हर रिपोर्ट को समय पर तैयार कर डीएम व अन्य अधिकारियों के पास भेज देते थे। डीएम डा.निलेश चंद्र देवरे ने कई बार कलेक्ट्रेट के कर्मियों को कोविड का टीका लेने का आदेश दिया। एक बार तो कोविड का टीका नहीं लेने वालों के खिलाफ वेतन बंद करने का भी मूड बनाया था, पर डीएम ने सोचा कि कोरोना काल में सबको पैसे की जरूरत है, ऐसे में यह कदम नहीं उठाया। डीएम को यह बात साल रही है, उनका कहना है कि यदि उन्होंने वेतन बंद कर दिया होता तो मजबूरन प्रकाश समेत अन्य लोग टीका ले लेते और आज यह दिन नहीं देखने को मिलता। दूसरी और प्रकाश ने भी लापरवाही की और टीका नहीं लेकर मौत को काफी नजदीक कर लिया। सभी का कहना है कि प्रकाश यदि टीका लिए होते तो कम से कम इलाज कराने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता और बचने का चांस 95 फीसदी हो जाता। 
## घटना से डीएम हुए मर्माहत
इस घटना ने सारण डीएम डा.नीलेश चंद्र देवरे को झकझोर कर रख दिया है। उन्होने मीडिया को बताया कि प्रकाश के निधन से पूरा प्रशासनिक महकमा मर्माहत है। पिछले दस दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। घर पर ही इलाज चल रहा था। उन्होंने कोविड19 का टीका नहीं लिया था। टीका लिए होते तो यह घटना नहीं होती। कलेक्ट्रेट को अपूरणीय क्षति हुई है। सबसे बड़ा दुख तो परिवार के लिए है। उनके दो बच्चे हैं।
## अनुकंपा बहाली के लिए 24 घंटे में कागज तैयार करने का निर्देश
डीएम ने प्रकाश की मौत को काफी गंभीरता से लेते हुए उनके आश्रित को अनुकंपा पर बहाल करने के लिए 24 घंटे के अंदर सभी कागजात तैयार करने को कहा है। स्थापना के डिप्टी कलेक्टर को सख्त ताकीद किया गया है। उनको मलाल है कि टीकाकरण को लेकर बिहार में सबसे अधिक प्रयास सारण में हुआ था और सारण तेजी से आगे बढ़ रहा था। इस महामारी में सभी को रूपये की जरूरत थी, इसलिए वेतन रोकने का निर्णय नहीं लिया गया था, जो गलत साबित हुआ। प्रखंडों के वरीय प्रभारी से सूची इसीलिए मांगी गयी थी। प्रकाश यदि ससमय टीका ले लिए होते तो  यह घटना नहीं होती। यह घटना सामूहिक असफलता का परिचायक है। इसे मानता भी हूं।
## सभी से टीका लगाने की करबद्ध प्रार्थना की
डीएम ने सरकारी कर्मियों समेत आम लोगों से करबद्ध प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी लोग अपने आस-पास के स्वास्थ्य केन्द्रों पर जाकर कोविड का टीका ले। कार्यपालक सहायक से लेकर पीआरएस तक को टीका लेना है। प्रकाश एक चमकता हुआ सितारा था जिसे ईश्वर ने अपने पास बुला लिया।
## 10 दिन पहले अपने पुत्र का उत्सव के रूप में मनाया था जन्म दिन
प्रकाश की शादी के अभी छह साल पूरे हुए थे। बीते अप्रैल के 29 तारीख यानि दस दिन पहले अपने बड़े पुत्र का पांचवा बर्थ-डे सेलेब्रेट किया था। उसी दिन उनके शादी के छह साल पूरे हुए थे। दोनो समारोहों को उन्होंने काफी बेहतर रूप में अपने ही घर में परिवार के सदस्यों के बीच मनाया था। वे दस दिन से बीमार थे फिर भी अपने कार्य के प्रति इतने जवाबदेह थे कि दो दिन पहले तक कार्यो को निपटाया था।

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